तुम मुझे क्षमा मत करो पर मानो मैंने जानबूझकर कुछ नहीं किया !!! तुम मुझे क्षमा मत करो पर मानो मैंने जानबूझकर कुछ नहीं किया !!!
सेवा, स्नेह, संस्कार, त्याग से परिपूरित है नारी।। सेवा, स्नेह, संस्कार, त्याग से परिपूरित है नारी।।
काल जाता है ठहर टूट पड़ता है कहर क्षमा माँगता अतीत काल जाता है ठहर टूट पड़ता है कहर क्षमा माँगता अतीत
अपने को क्षमा कीजिये, अपने को क्षमा कीजिये,
हाँ तुम बढ़ रहे हो पर साथ हम शिथिल हो रहे हैं। हाँ तुम बढ़ रहे हो पर साथ हम शिथिल हो रहे हैं।
और न ही उसका कोई मित्र होता जो भूल करने पर भी नहीं पछताता। और न ही उसका कोई मित्र होता जो भूल करने पर भी नहीं पछताता।